Track your nutrition and health goals

लेखिका: Hafsaa Farooq, कंसल्टेंट डायटीशियन, Clearcals | अपडेट: मई 2026
प्रेगनेंसी (pregnancy) के दौरान वजन बढ़ना, प्रीनेटल पोषण के सबसे ज्यादा गलत समझे जाने वाले पहलुओं में से एक है। बहुत कम वजन बढ़ना, जन्म के समय कम वजन (low birth weight), समय से पहले जन्म (preterm birth) और विकास संबंधी जटिलताओं से जुड़ा होता है।
वहीं बहुत ज्यादा वजन बढ़ना, गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज (gestational diabetes), प्री-एक्लेम्प्सिया (pre-eclampsia), सिजेरियन डिलीवरी और डिलीवरी के बाद वजन कम करने में मुश्किल से जुड़ा होता है। लक्ष्य एक तय संख्या नहीं, बल्कि एक रेंज होता है — और यह आपके प्रेगनेंसी से पहले के BMI पर निर्भर करता है।
नीचे दिए गए दिशानिर्देश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन (Institute of Medicine, IOM) की सिफारिशों पर आधारित हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती हैं और भारतीय प्रसूति (obstetric) प्रैक्टिस में भी संदर्भित होती हैं:
| प्रेगनेंसी से पहले का BMI | श्रेणी | सुझाया गया कुल वजन वृद्धि |
|---|---|---|
| 18.5 kg/m² से कम | कम वजन (Underweight) | 12.5–18 kg |
| 18.5–24.9 kg/m² | सामान्य वजन (Normal) | 11.5–16 kg |
| 25.0–29.9 kg/m² | अधिक वजन (Overweight) | 7–11.5 kg |
| 30.0 kg/m² और उससे ऊपर | मोटापा (Obese) | 5–9 kg |
ये रेंज एक बच्चे वाली (singleton) प्रेगनेंसी के लिए हैं। जुड़वां (twin) प्रेगनेंसी में सामान्य वजन वाली महिलाओं के लिए 16–20 kg की जरूरत होती है।
भारतीय महिलाओं के लिए एक जरूरी बात: भारतीय महिलाओं का प्रेगनेंसी से पहले का BMI आमतौर पर पश्चिमी आबादी की तुलना में कम रहता है, और भारतीय महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही कम वजन (underweight) के साथ प्रेगनेंसी शुरू करता है। ऐसी महिलाओं के लिए 12.5–18 kg वजन बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करना खासतौर पर जरूरी है, क्योंकि भारतीय नवजात शिशुओं में जन्म के समय कम वजन का खतरा असमान रूप से ज्यादा होता है — भले ही मां का वजन बढ़ना पश्चिमी मानकों के हिसाब से "पर्याप्त" दिखे।
प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ना एक समान गति से नहीं होता — पहले ट्राइमेस्टर में बहुत कम वजन बढ़ता है, जबकि ज्यादातर वृद्धि दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में होती है, जब बच्चा तेजी से बढ़ता है और मां का ब्लड वॉल्यूम, तरल पदार्थ और ऊतक (tissue) बढ़ते हैं।
सामान्य BMI वाली महिला के लिए अनुमानित हफ्ते-दर-हफ्ते वजन वृद्धि (लक्ष्य: कुल लगभग 12–14 kg):
| ट्राइमेस्टर | हफ्ते | कुल वजन वृद्धि (संचयी) |
|---|---|---|
| पहला ट्राइमेस्टर | 1–13 | कुल 0.5–2 kg |
| दूसरा ट्राइमेस्टर (शुरुआती) | 14–20 | कुल 3–5 kg |
| दूसरा ट्राइमेस्टर (बाद का) | 21–27 | कुल 6–8 kg |
| तीसरा ट्राइमेस्टर (शुरुआती) | 28–34 | कुल 9–11 kg |
| तीसरा ट्राइमेस्टर (बाद का) | 35–40 | कुल 11–14 kg |
वजन बढ़ने की औसत दर: पहले ट्राइमेस्टर में लगभग कोई वजन बढ़ने की उम्मीद या जरूरत नहीं होती। दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में सामान्य वजन वाली महिला को लगभग 0.35–0.5 kg प्रति हफ्ता वजन बढ़ाना चाहिए। लगातार 0.6 kg/हफ्ता से ज्यादा वजन बढ़ने पर डाइट की समीक्षा जरूरी है; दूसरे/तीसरे ट्राइमेस्टर में 0.25 kg/हफ्ता से कम वृद्धि, अपर्याप्त पोषण का संकेत हो सकती है।
अपना वजन रोज नहीं, बल्कि अपनी प्रीनेटल अपॉइंटमेंट्स पर ट्रैक करें — तरल पदार्थ रुकने (fluid retention) की वजह से दिन-प्रतिदिन का उतार-चढ़ाव 0.5–1 kg तक हो सकता है और बेवजह चिंता पैदा कर सकता है।
बढ़ा हुआ वजन किस चीज को दर्शाता है, यह समझने से इन आंकड़ों को सही नजरिए से देखने में मदद मिलती है। 12 kg बढ़ाने वाली सामान्य वजन की महिला के लिए:
| घटक | अनुमानित वजन |
|---|---|
| बच्चा | 3.0–3.5 kg |
| प्लेसेंटा (Placenta) | 0.6–0.7 kg |
| एमनियोटिक फ्लूइड (Amniotic fluid) | 0.8–1.0 kg |
| बढ़ा हुआ ब्लड वॉल्यूम | 1.2–1.5 kg |
| गर्भाशय (uterus) का बढ़ना | 0.9–1.0 kg |
| स्तन ऊतक (breast tissue) | 0.5–0.8 kg |
| मां का फैट स्टोर (स्तनपान के लिए ऊर्जा भंडार) | 2.5–3.5 kg |
| तरल पदार्थ का रुकना (fluid retention) | 1.0–1.5 kg |
मां का फैट स्टोर जानबूझकर और जरूरी होता है — यह शरीर की, स्तनपान (breastfeeding) की कैलोरी संबंधी जरूरतों के लिए तैयारी है। डाइट में कटौती करके प्रेगनेंसी वेट गेन के इस हिस्से को टालने की कोशिश उल्टी पड़ती है और बच्चे के विकास के लिए खतरा पैदा करती है।
पहला ट्राइमेस्टर: पहले ट्राइमेस्टर में किसी बड़ी अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत नहीं होती। गुणवत्ता पर ध्यान दें: इस दौरान फोलिक एसिड (folic acid) (400–600 mcg/दिन), आयरन (iron) और आयोडीन (iodine) बेहद जरूरी हैं। मतली (nausea) की वजह से अक्सर खाना मुश्किल हो जाता है — थोड़ा-थोड़ा और बार-बार खाना, अदरक की चाय, सादे बिस्किट और ठंडे खाद्य पदार्थ (जिनकी महक कम होती है) आमतौर पर मदद करते हैं।
दूसरा ट्राइमेस्टर: प्रेगनेंसी से पहले के सेवन से रोजाना 300–350 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत होती है। यह लगभग बराबर है: एक गिलास फुल-फैट दूध (150 kcal) + एक केला (100 kcal) + 10 बादाम (70 kcal)। दूसरे ट्राइमेस्टर में आमतौर पर भूख वापस आती है और खाना फिर से आनंददायक लगने लगता है।
तीसरा ट्राइमेस्टर: प्रेगनेंसी से पहले के सेवन से रोजाना 450–500 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत होती है। बच्चा तेजी से बढ़ रहा होता है और मां की ऊर्जा की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। पोषक तत्वों की सघनता (nutrient density) पर ध्यान दें — इस दौरान आयरन, कैल्शियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड (DHA) और विटामिन D सबसे जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व (micronutrients) हैं।
इन खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें:
प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ाने वाले व्यावहारिक भारतीय भोजन:
प्रेगनेंसी के दौरान इन्हें सीमित करें: कच्चा पपीता और कच्चा अनानास (पारंपरिक रूप से परहेज, कुछ प्रमाण गर्भाशय संकुचन वाले तत्वों के हैं); ज्यादा पारा (mercury) वाली मछलियां (शार्क, स्वोर्डफिश, किंग मैकरल); बिना पाश्चराइज्ड डेयरी; शराब; ज्यादा कैफीन (200mg/दिन से कम रहें, यानी 1–2 छोटे कप कॉफी)।
वजन बहुत तेजी से बढ़ना: मात्रा के बजाय भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान दें। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (मैदा, सफेद ब्रेड, पैकेज्ड स्नैक्स) की जगह साबुत अनाज लें। तली-भुनी चीजें, घी से भरी मिठाइयां और मीठे पेय कम करें। रोजाना 30 मिनट की सैर जोड़ें — जब तक आपके प्रसूति विशेषज्ञ (obstetrician) मना न करें, यह पूरी प्रेगनेंसी में सुरक्षित है।
वजन बहुत धीरे बढ़ना (खासकर अगर प्रेगनेंसी से पहले कम वजन था): एक चौथा भोजन या नियमित स्नैक जोड़ें। कैलोरी से भरपूर साबुत खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें: मेवे, फुल-फैट डेयरी, पीनट बटर, एवोकाडो और सूखे मेवे। पेय के रूप में कैलोरी लेना (फुल-फैट दूध, लस्सी, स्मूदी) बिना असहज पेट भरे पोषण जोड़ता है। अगर वजन लगातार 3 या उससे ज्यादा हफ्तों तक लक्ष्य से कम रहे, तो अपने प्रसूति विशेषज्ञ और एक रजिस्टर्ड डायटीशियन से सलाह लें।
Hafsaa Farooq Clearcals में कंसल्टेंट डायटीशियन हैं, जिन्हें पोषण, फिटनेस और प्रमाण-आधारित (evidence-based) स्वास्थ्य पद्धतियों में गहरी रुचि है।
उनकी क्लिनिकल न्यूट्रिशन में गहरी दिलचस्पी है और वे व्यावहारिक डाइट मार्गदर्शन के जरिए लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मदद करना पसंद करती हैं। अपने पेशेवर काम के अलावा, Hafsaa को स्वस्थ रेसिपी बनाना, प्रमाण-आधारित पोषण ब्लॉग लिखना और खेलों के जरिए सक्रिय रहना पसंद है। वे समग्र स्वास्थ्य और फिटनेस लक्ष्यों को बेहतर तरीके से सहयोग देने के लिए एक्सरसाइज और वेट ट्रेनिंग के विज्ञान में अपनी विशेषज्ञता का भी विस्तार कर रही हैं।
🔗 Hafsaa से LinkedIn पर जुड़ें
👉 पिलर पेज पर वापस जाएं: Healthy Weight Gain: Complete Indian Guide 👉 संबंधित: Weight Gain for Women | BMI Calculator