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क्रॉनिक बीमारियां (chronic diseases), जीवनशैली और आहार में पोषक तत्वों की कमी क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन (chronic inflammation) यानी लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन का कारण बनती है। यह शरीर के सभी शारीरिक कार्यों (physiological functions) पर नकारात्मक प्रभाव डालती है और डायबिटीज (diabetes), कैंसर (cancer), हृदय संबंधी विकार (cardiovascular disorders), ऑटोइम्यून विकार (autoimmune disorders) और उम्र बढ़ने (aging) जैसी कई बीमारियों को जन्म देती है1।
फलों, सब्जियों, दालों और तिलहन जैसे उच्च फीनोलिक यौगिकों (phenolic compounds) वाले आहार, जिनमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी (anti-inflammatory) गुण होते हैं, क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन को कम करने में प्रभावी साबित हुए हैं2।
वसा (fats), विशेष रूप से मछली के तेल और अलसी (flaxseeds), अखरोट (walnuts), चिया सीड्स (chia seeds) व एडामे (edamame) जैसे पौधों के स्रोतों से मिलने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड (omega-3 fatty acids), क्रॉनिक इन्फ्लेमेटरी बीमारियों के प्रभावों को कम करने में सकारात्मक असर दिखाते हैं3।
सी-रिएक्टिव प्रोटीन (C-Reactive Protein, CRP) और एरिथ्रोसाइट सेडिमेंटेशन रेट (Erythrocyte Sedimentation Rate, ESR) शरीर में सूजन का पता लगाने के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली दो जांचें हैं। ये दोनों जांचें अकेले क्रॉनिक बीमारियों का पता नहीं लगातीं, लेकिन ये संक्रमण (infection) और सूजन के लिए एक बायोमार्कर (biomarker) के रूप में काम करती हैं, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों को आगे की जांच के लिए सतर्क कर देती हैं।
संदर्भ (REFERENCES)