Track your nutrition and health goals

लेखिका: डॉ. सुमेधा वर्मा, कंसल्टेंट फिजीशियन, Clearcals
ज्यादातर भारतीयों के लिए रोज के सबसे अच्छे कैल्शियम स्रोत हैं दूध, दही, पनीर और चीज़; रागी; तिल; और चौलाई, सहजन के पत्ते व मेथी जैसी कुछ हरी पत्तियां। अगर आप मछली खाते हैं तो हड्डी सहित खाई जाने वाली छोटी मछलियां बहुत अच्छी हैं। वीगन लोग रागी, तिल, कैल्शियम से बना टोफू, फोर्टिफाइड प्लांट मिल्क और कुछ हरी पत्तियां ले सकते हैं। ज्यादातर वयस्कों को रोजाना लगभग 1,000 mg चाहिए, जो विविध खाने से पूरा हो सकता है। विटामिन D इसे सोखने में मदद करता है, इसलिए दोनों साथ काम करते हैं।
शरीर का लगभग 99 प्रतिशत कैल्शियम हड्डियों और दांतों में होता है, और बाकी मांसपेशियों, नसों, दिल और खून जमने में मदद करता है। अगर आप पर्याप्त नहीं खाते तो शरीर इसे हड्डियों से खींच लेता है, जिससे आगे चलकर हड्डियां कमजोर होने (ऑस्टियोपोरोसिस) का खतरा बढ़ता है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं में खतरा ज्यादा होता है, और किशोरों तथा गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं की जरूरत ज्यादा होती है।
भारतीय मानकों (ICMR-NIN) के अनुसार वयस्कों को रोजाना लगभग 1,000 mg चाहिए। किशोरावस्था की बढ़त के सालों में और स्तनपान के दौरान जरूरत ज्यादा होती है, और बच्चों को उम्र के हिसाब से कम। अगर आपको हड्डी, किडनी या कोई और बीमारी है तो डॉक्टर या डायटीशियन अलग लक्ष्य तय कर सकते हैं। खाने और सप्लीमेंट मिलाकर रोजाना लगभग 2,500 mg से ज्यादा लेने की सलाह नहीं दी जाती।
नीचे की संख्याएं एक सामान्य सर्विंग के अनुमानित आंकड़े हैं। ब्रांड, किस्म और बनाने के तरीके से ये बदलते हैं।
| खाना | सामान्य सर्विंग | लगभग कितना कैल्शियम | जानकारी |
|---|---|---|---|
| दूध (गाय या भैंस) | 1 गिलास (250 मिली) | लगभग 300 mg | टोंड, फुल-फैट और स्किम्ड में कैल्शियम लगभग बराबर। |
| दही | 1 कटोरी (100 ग्राम) | लगभग 100 से 150 mg | छाछ में कम। |
| पनीर | 50 ग्राम | लगभग 100 से 250 mg | फैट के अनुसार अलग। |
| चीज़ | 1 स्लाइस या 20 ग्राम | लगभग 100 से 200 mg | लेबल देखें। |
| रागी | 50 ग्राम आटा | लगभग 170 mg | पौधों का मजबूत स्रोत। रागी डोसा, रोटी, दलिया, इडली। |
| तिल | 1 बड़ा चम्मच (10 ग्राम) | लगभग 100 mg | चिक्की, लड्डू, चटनी, या सलाद पर छिड़कें। |
| चौलाई, सहजन के पत्ते, मेथी | 1 पकी कटोरी | लगभग 150 से 250 mg | पालक से बेहतर सोखे जाते हैं। |
| कढ़ी पत्ता | एक मुट्ठी | अच्छी मात्रा | रोज तड़के में डालते हैं, तो जुड़ता जाता है। |
| बादाम | 10 | लगभग 30 mg | मददगार पर मुख्य स्रोत नहीं। |
| सूखे अंजीर | 2 से 3 | लगभग 60 से 80 mg | उपयोगी स्नैक। |
| कैल्शियम से बना टोफू | 100 ग्राम | लगभग 200 से 350 mg | लेबल पर कैल्शियम साल्ट देखें। |
| हड्डी सहित छोटी मछली | 50 ग्राम | ज्यादा | मछली खाते हों तो उत्तम। |
| फोर्टिफाइड दूध, प्लांट मिल्क या सीरियल | लेबल के अनुसार | लेबल के अनुसार | वीगन के लिए उपयोगी। |
कैल्शियम ऑक्सलेट सबसे आम प्रकार की किडनी स्टोन है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खाने का कैल्शियम घटा दें। खाने में कैल्शियम अक्सर स्टोन का खतरा घटाता है, क्योंकि यह आंत में ऑक्सलेट से जुड़ जाता है। अगर आपको किडनी स्टोन है तो कैल्शियम वाले खाने बदलने या कैल्शियम की गोली लेने से पहले डॉक्टर से पूछें।
इनके दूसरे कारण भी हो सकते हैं, और कम कैल्शियम अक्सर कम विटामिन D, मैग्नीशियम या किडनी, थायरॉइड या पैराथायरॉइड की समस्या से जुड़ा होता है। जानने का तरीका ब्लड टेस्ट है। अंदाजे से गोलियां शुरू न करें।
जो स्वस्थ लोग डेयरी या दूसरे कैल्शियम वाले खाने खाते हैं, उनमें से ज्यादातर को गोली की जरूरत नहीं होती। अगर डॉक्टर ने लिखी है:
यह नमूना है, कोई तय योजना नहीं, और मात्राएं अनुमानित हैं। अपनी जरूरत और डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के अनुसार बदलें।
| समय | उदाहरण | लगभग कैल्शियम |
|---|---|---|
| नाश्ता | दूध से बना रागी डोसा या दलिया | 250 से 350 mg |
| मध्य-सुबह | एक गिलास छाछ और 2 अंजीर | 150 से 200 mg |
| दोपहर | रोटी, दाल, चौलाई या मेथी की सब्जी, एक कटोरी दही | 250 से 350 mg |
| शाम | तिल की चिक्की या मुट्ठी भर बादाम, चाय | 80 से 120 mg |
| रात | पनीर या टोफू की सब्जी, रोटी, तिल वाला सलाद | 150 से 250 mg |
| दिन का कुल | लगभग 900 से 1,300 mg |
वीगन लोग दूध-दही की जगह फोर्टिफाइड प्लांट मिल्क और ज्यादा टोफू, रागी व तिल ले सकते हैं।
यह जानना मुश्किल है कि आपका रोज का खाना 1,000 mg तक पहुंचता है या नहीं। Hint में आप अपना भारतीय खाना लॉग कर सकते हैं और अपना कैल्शियम सेवन ट्रैक कर सकते हैं, कैलोरी, प्रोटीन और जरूरी विटामिनों के साथ, मुफ्त में। एक हफ्ते बाद दिखता है कि कौन से दिन लक्ष्य से काफी नीचे थे, और दही, रागी या तिल जैसे कौन से खाने कमी सबसे आसानी से पूरी करेंगे। Hint खाने से सेवन का अनुमान लगाता है और ब्लड टेस्ट या डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता। हमारा मुफ्त भारतीय खाने का कैलोरी कैलकुलेटर भी आजमाएं।
सबसे ज्यादा कैल्शियम किसमें होता है? रोजमर्रा के भारतीय खाने में तिल, रागी, दूध, दही, पनीर, चीज़, हड्डी सहित छोटी मछलियां और चौलाई व सहजन के पत्ते जैसी कुछ हरी पत्तियां शीर्ष स्रोत हैं।
कौन से शाकाहारी खाने में कैल्शियम ज्यादा है? दूध, दही, पनीर, रागी, तिल, चौलाई और सहजन के पत्ते, मेथी, कढ़ी पत्ता, अंजीर और कैल्शियम से बना टोफू।
किस फल में कैल्शियम ज्यादा होता है? फलों में कैल्शियम सीमित होता है। सूखे अंजीर, संतरा और कीवी थोड़ा योगदान देते हैं। कैल्शियम के लिए फलों पर निर्भर न रहें।
क्या पालक कैल्शियम का अच्छा स्रोत है? कागज पर ज्यादा दिखता है, पर ऑक्सलेट ज्यादातर कैल्शियम का अवशोषण रोक देता है। इसके बजाय चौलाई, सहजन के पत्ते या मेथी चुनें।
रोजाना कितना कैल्शियम चाहिए? ज्यादातर वयस्कों को रोज लगभग 1,000 mg, किशोरावस्था की बढ़त और स्तनपान में ज्यादा। डॉक्टर अलग सलाह दे सकते हैं।
कैल्शियम की कमी से क्या होता है? मांसपेशियों में ऐंठन, झनझनाहट, थकान, और समय के साथ कमजोर हड्डियां।
कैल्शियम की कमी में क्या खाएं? दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और चौलाई जैसे ऊपर की सूची के खाने, और विटामिन D के लिए धूप। गोली डॉक्टर की सलाह पर ही।
क्या बिना दूध के पर्याप्त कैल्शियम मिल सकता है? हां, रागी, तिल, कैल्शियम से बने टोफू, फोर्टिफाइड प्लांट मिल्क और कुछ हरी पत्तियों से, पर इसमें योजना चाहिए।
क्या किडनी स्टोन में कैल्शियम से बचना चाहिए? खुद से नहीं। डॉक्टर से पूछें, क्योंकि खाने का कैल्शियम अक्सर मदद करता है।
चिकित्सीय अस्वीकरण। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सीय सलाह नहीं है। इस लेख के आधार पर कैल्शियम या विटामिन D सप्लीमेंट शुरू, बंद या न बदलें। लक्षण हों, हड्डी या किडनी की बीमारी हो, या आप गर्भवती या स्तनपान करा रही हों, तो अपने डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से बात करें।
यहां से शुरू करें: भारतीय खाने के लिए कैलोरी ट्रैकिंग (अंग्रेज़ी में), अगर आप भोजन लॉग करना शुरू कर रहे हैं।
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मुफ्त टूल (अंग्रेज़ी में):
डॉ. सुमेधा वर्मा Clearcals में कंसल्टेंट फिजीशियन हैं, जिन्हें क्लिनिकल मेडिसिन और हेल्थकेयर सेवाओं का व्यापक अनुभव है।
उन्हें डायबिटीज, थायरॉइड विकार, पीसीओएस, बांझपन और अन्य स्त्री रोग संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं जैसी पुरानी बीमारियों के प्रबंधन में विशेष विशेषज्ञता है।
मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए जानी जाने वाली डॉ. वर्मा मरीजों के इलाज में नियमितता बढ़ाने और व्यक्तिगत चिकित्सा मार्गदर्शन व दीर्घकालिक देखभाल के जरिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम पाने में उनकी मदद पर ध्यान देती हैं।
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